Wednesday, 3 October 2012

अबूझा

थे कुछ उनींदे से हम...
अबूझे इक सवाल ने... 
झकझोर कर जगाया हमे 
सवाल भी सवाल करने... 
रख कमर पर हाथ... 
खड़ा हो गया... 
बोला...
मेरा क्या ???

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