सरल सृजन
सृष्टि का एक सरल सृजन ....संज्ञा.... अंजलि !!!!!
Sunday, 23 March 2014
उदास मन से लिखी, आशा भरी कविता
पिरोये
कुछ टेसू कुछ गुलमोहर
रौनक लपेटने की भी कोशिश थी
और बसंत का तकाजा भी
आसमान का जिक्र करना चाहा
कुछ परिंदों के रूपक भी दिए
फिर भी उदास मन से लिखी
आशा भरी कविता
सांवली ही नजर आई
जबकि रंग पलकों में ही छिपे थे
1 comment:
Unknown
25 July 2014 at 11:33
आ शा भरी कविता सांवली ही रह गयी
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आ शा भरी कविता सांवली ही रह गयी
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