Tuesday, 22 January 2013

मौन के गाँव....!!!


अब के जब....
लौट के आओगे तुम....
हाथ थामे तुम्हारा....
चलेंगे...
छिप कर सबसे...
बाजार के...
पीछे वाली गली से....
ढलान वाली सड़क से उतरकर....
ढूंढेंगे नया इक गाँव....
सुनो वो जंगल के चरमराते पत्ते....
बता सकते हैं हमे आगे जाने का रास्ता....
जहा से लौट पड़े थे हम पिछली दफा .....
झुरमुटो से निकल कर.....
उधर टीलों की बस्ती.... आगे ही मिलेगा ....
मौन का गाँव....
जहा गीत रहता है.....
ले चलोगे न?

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