सरल सृजन
सृष्टि का एक सरल सृजन ....संज्ञा.... अंजलि !!!!!
Tuesday, 22 January 2013
सपनीले
सुनो प्रिय
अब भी मै इकट्ठे करती हूँ लजीले किसलय
अब भी मेरी आदत फूलो को सहलाने की
रेत से ढूंढ लाये थे जो
तुम
सपनीले सफ़ेद पत्थर
अब भी बाँध रखे हैं मैंने दुपट्टे
के कोने से
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