Friday, 28 June 2013

चूड़ियाँ... :o

तेरे लिए... 
कि अब तू सो सके...
भर नींद... 

भोर होते ही...
नही सतायेंगी वो तुझे... 
न शोर मचायेंगी... 

न खनखनायेंगी... 
तू सो सके बेखलल... 
इसलिए बदल दिया मैने... 

खुद को संवारने का ढंग... 
ले आयी हूँ मैं...
प्लास्टिक की चूड़ियाँ...

1 comment:

  1. सम्मोहन टूटू जाएगा
    सपना बिखर जाएगा
    ना होगी जो कांच की चूडिय़ां
    एक मंत्र रूप जाएगा

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