सरल सृजन
सृष्टि का एक सरल सृजन ....संज्ञा.... अंजलि !!!!!
Sunday, 23 March 2014
लावारिस
एक वो,जो पहला
रस्ते में मरा पड़ा मिला
एकदम टुकड़ों में
एक वो,जो दूसरा
उधर से गुजर रहा था
उसे रुमाल में बाँध के घर ले आया है
टुकड़े टुकड़े जोड़कर फिर गढ़कर उसके अस्थिपंजर
और दूर यात्रा पर निकल गया
अपनी नयी प्रेमिका के पास...
1 comment:
Unknown
25 July 2014 at 10:55
संज्ञा ?
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संज्ञा ?
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