Sunday, 24 August 2014

बातें...

एक पागल सी लड़की उँगलियों में तीलियाँ दबाये घूमती है 
दिल का अरमान सिगरेट की मानिंद हौले हौले सुलगता हुआ ,
जहरीला सा धुंआ छोड़ता है उसके चेहरे के आस पास.....
हर बार बिखरी हुई जुल्फों के बीच चमकती है उसकी 
आँखों में नफरत .... हा हा हा... चौंक गये क्या?
हाँ चमकीली सी नफरत ....ताकीद मुहब्बतों की, भूलने के बाद...

चुप रहना तुम, किसी से न कहना कि उसने तुम्हे बता रखा है कि 
‘जल्दी ही मैं अपनी दुनिया में आग लगाने वाली हूँ
बस कुछ जरूरी सामान समेटने के लिए रुकी हूँ ‘
उसके कहने पे मत जाना, ये सब बहाने हैं 
किसी भी पल फर्र्र्रर करती हुई एक तीली वो उछाल सकती है
धीरे धीरे एक कोने से जलना शुरू होगी ये दुनिया 
और सुलगते , भभकते देखना कितनी सरलता से नष्ट होगी ये सृष्टि 

.....और उसके बाद राते भी उजली हुआ करेंगी 
फिर सबसे पहले बुझा देना चाँद को, कोई जरुरत नही रहेगी इसकी 
दिन रात का फर्क मिट जाने से रातरानियाँ जी उठेंगी फिर 
रास्तो को समेटकर ,गलीचो और गद्दों वाली पेटी में डाल देना 
फिर तुम कभी न सोना ,कही सपनो में नई दुनिया न बसा बैठो 
नही फिर एक तीली का खर्चा बढ़ा दोगे 

............और हर रात गुलमोहर की शाखों से बाते करना

1 comment:

  1. जागती आंखों के स॔कल्प कई बार हार जाते हैं
    सोती आंखों के सपनों से ।

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