Friday, 28 June 2013
Wednesday, 15 May 2013
पहुँच...
चेहरों को टटोल कर देखना चाहती मैं... और उसके लिये किसी के पास तक जाना होगा... किसी और तक पहुचने के लिए... उसे पाने तक आने का रास्ता देना होगा... और रास्ता देने का मतलब... खोलने होंगे दिल के दरवाजे... हैंडल हाथो में हैं... पर खींचने के लिए चाहिए हिम्मत... और हिम्मत हार जाती हूँ मैं... तुम्हारे बिना... हाँ... तुम्हारे बिन तुम तक ही नही पहुच सकती.......
Thursday, 25 April 2013
रंग धूप के
मेरा नाम का भी तो कोई रंग होगा...न न...गहरे रंग नही फबते मुझ पर....हलके ही चाहिए...
मगर...हलके रंग कच्चे होते हैं...उड़ जाते हैं...जरा देर धूप में रख दो तो....फिर...सोचती हूँ...अब की बार...धूप को ही आजमाऊ....कई शेड में मिल जाएगी न....पर्स की पिछली जेब में सहेज कर रख लुंगी....और...जब उदासी घेरेगी....थोडा सा धूप का रंग मल दूंगी....चेहरे पर...मगर...सोचती हूँ ...दिन ढलने के बाद क्या होगा...
18/03/13
Sunday, 17 March 2013
रास्ते
मैंने सोचा
मैं मंजिल को जाती हूँ
फिर सोचा, नही;
मैं रास्तो से जाती हूँ
किसी ने कहा
दूरी है, वेग चाहिए
किसी ने कहा
पास ही
मंथर ही चल
मगर, जो समझा
तो चौंक पड़ी
मंजिल दूर नही कि
चलने से मिल जाये
बेवजह दौड़ लगाई मैंने
हा!
साँसे उखड़ने लगी थी
अब तो
और
अब तक
मेरे भीतर
ठहरी
मेरे चलने से चूक गयी
मंजिल
जब ठहर गई
तो पा लिया |
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