Friday, 28 June 2013

सवाल..?

सुनो! मैं चाहती हूँ,इस बार,जल्दी आये,बारिश,और मैं,अपने धारे छोड़,बेवक्त, मिल जाऊँ तुममे,भुलाकर,समांतर होने की शर्तें,मैं आ सकूँ,उस किनारे,तुम तक,और बहूं,दूर तक,कहो, आऊँ न?





2 comments:

  1. आना तो बदलते हुये मौसम की तरह मुझे नहीं चाहिए कोई बाह किसी छल के लिये

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