Wednesday, 17 June 2015

अफवाहें

उस पार, वो बड़ी देर से सोच में बैठे हैं । किसी ने उनसे कह दिया है कि खत्म होने वाली हैं औरतें इस जहाँ से। वो सहमे से बैठे हैं उन्होंने तीन क़त्ल करवाई हैं बीते 21 महीनों में। धंधेबाज हैं, नया बिजनेस आईडिया ढूंढ लेते हैं इसमें भी। कालाबाजारी कर लो... थोक में ब्याह लो अधिक से अधिक। बाद में मोलभाव करके देख लेंगे।
इस पार कुछ और ही चल रहा है। उन्हें नहीं मालूम औरतें बड़ी जीवट हैं। अलग ही तरह का जंतु हैं । कभी न मरने वाली ... रक्ताभ चट्टानों की ईजाद। कोई नींद का फसाद बता उन्हें। वो ख्वाब में हैं और औरते रक्त में सनी सांस लेती हुई, अपनी पिछली पिधिनकी कोख में; कभी न रुकने वाली धडकनों के साथ।
ये फ़कत एक अफ़वाह है कि औरतों ने ये ग्रह छोड़ने का निश्चय किया है। वो कभी ख़त्म होने वाली नहीं हैं।

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