Wednesday, 17 June 2015

यहाँ से वहां

ये जगह, जहाँ मैं हूँ, मुझे बहुत पसंद है
वो जगह, जहाँ मुझे भेजा गया था, नापसंद थी
बालों में लगाने के फूल, दिन में पढने की जगह
कविताओं के विषय, रात में काम करने का ठिकाना
हमेशा अपनी पसंद से चुनती आई हूँ मैं
इस ठिकाने को लिखना है मुझे, या सजाना है बालों में
अब तक तय नहीं कर पाई थी मैं
कुछ भी करना है इक शुक्रीय अदा करने के लिए
बस एक सफ़र, जो नापसंद है
उस सफ़र को गंदे जूते पहन कर ही पूरा कर लेना है

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