Wednesday, 17 June 2015

नाउम्मीदी

काश! मैं लड़की होने की बजाय कोई पेड़ होती
जंगली पेड़, उजाड़, जिसमे कोई फल नहीं लगता
पत्ते भी नहीं
तब मैं उम्मीदों से देखती इन्सान को 
और खुश हो सकती कि
अच्छा है, मैं एक पेड़ हूँ
मुझे ताउम्र इस बात का अफसोस रहेगा
कि मैं एक लड़की हूँ
पेड़ नहीं
(.... नही! तुम सा हो जाना मैंने कभी चाहा ही नहीं।
मैं लड़की ही ठीक हूँ
या फिर एक पेड़ ही अच्छी। )

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