१...
जागती आँखों के सपने... जैसे मालाबार तट पर आती जाती लहरें
बेचैन समंदर के लिए भी नींद एक गैरजरूरी शय है, तुम्हारी मानिंद ...
२...
वक़्त पड़ा है, काम आये कोई
चाहे तो, नींद उधार ले जाए कोई...
३...
चाँद की दो फांक वाली, बालियाँ मांगी थी मैंने
वो ऐसा कंजूस था कि गुस्सा दिला के बढ़ लिया!
४...
एक तीली मेरे पास कम है...
इसीलिए ये दुनिया कायम है...
५...
जाओ
एक बार फिर
चले जाओ
कम से कम
मुझे
मेरी कविताओं में तो
अकेला छोड़ दो!!!
५..
"पहला" मैदान पर उतरता बस है। smile emoticon
"दूसरा" आये तो खेला शुरू करता है। grin emoticon
"तीसरा" अक्सर खेल बिगड़ता है। unsure emoticon
"चौथा" खेल ख़त्म होने के बाद आता है। cry emoticon
जागती आँखों के सपने... जैसे मालाबार तट पर आती जाती लहरें
बेचैन समंदर के लिए भी नींद एक गैरजरूरी शय है, तुम्हारी मानिंद ...
२...
वक़्त पड़ा है, काम आये कोई
चाहे तो, नींद उधार ले जाए कोई...
३...
चाँद की दो फांक वाली, बालियाँ मांगी थी मैंने
वो ऐसा कंजूस था कि गुस्सा दिला के बढ़ लिया!
४...
एक तीली मेरे पास कम है...
इसीलिए ये दुनिया कायम है...
५...
जाओ
एक बार फिर
चले जाओ
कम से कम
मुझे
मेरी कविताओं में तो
अकेला छोड़ दो!!!
५..
"पहला" मैदान पर उतरता बस है। smile emoticon
"दूसरा" आये तो खेला शुरू करता है। grin emoticon
"तीसरा" अक्सर खेल बिगड़ता है। unsure emoticon
"चौथा" खेल ख़त्म होने के बाद आता है। cry emoticon
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