Wednesday, 17 June 2015

*** वो और वो ***

रात के सिहरते सन्नाटों में , 
अँधेरे के किसी छोर पर नजर टिकाकर 
वो कह बैठती है, मैं प्यार करना चाहती हूँ तुमसे
इस तरह के आरम्भ से
अचकचाया सा वो जैसे उठ बैठता है अपने स्वरों में भी
और कुछ न पाकर बस इतना ही कह पाता है कि, हाँ मैं भी
जब उसकी उलझती साँसों की आवाजें
हैडफ़ोन पर तूफ़ान सा प्रभाव बनाती हैं,
और सरसराहट के साथ पहुँचती हैं उस पार
उसके कानो को गर्म होने देता है वो भी
और चुप्पियाँ बातें करती है सारी रात, लगभग बुदबुदाते हुए

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