एक दिन जब कोई काम नहीं होता... बेवजह दो आंसू रोने की फुर्सत मिल जाती है। अरे अब भला हंसने का कोई कारण हुआ है कभी... न ही मिली है अब तक रोने की वजह। लिखा हुआ कुछ दिल में हैं ... कुछ आँखों में जो लिखने से चूक गया। रोशनाई बहती जरुर है... पर प्यास नहीं मिटा पाती। हरे कागजों के लिए , सफ़ेद कागजो को लिए बस खर्च होती जाती है। एक मशरूफ रात एक आरामतलब दिन से कहीं अच्छी है। बातो के हिज्जे नमकदार हैं । किस्से खर्च हो चुके हैं। कोई सुन ले तो बहुत कुछ कहना है मुझे...
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