Wednesday, 17 June 2015

अवसर

जिससे तुनक कर
फोन पटक
अखबार उठा लिया था मैंने
वो अब गार्ड ड्यूटी पर है
और तब मैं खबरे पढ़ रही हूँ
मैंने पढ़ा
युद्ध के हैं आसार, फौजें रहें तैयार
पढ़ कर, सहमती हूँ ,हर बार
हडबडाकर कर
फिर वही नम्बर डायल करती हूँ
और वो सिर्फ हंसता है
मेरी बाते सुनकर
पगली हो तुम कहते हुए...
सुनो, कहीं ये अनचाही घडी
करीब तो नहीं ?
वो फिर हंसता है और
दोहरा हुआ जाता है बार बार
आह! कितना मुश्किल है
युद्ध को तत्पर एक हँसते हुए
सैनिक की प्रेमिका होना
और फिर मैं
अख़बार के पन्नो पर
तलाशने लगती हूँ
युद्ध के पहले प्रेम का एक अवसर।। heart emoticon

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