अक्षर सब काले हैं
सदियों से
कितने भी लिखे जाएँ
नही कम होती
खीझ,गुस्सा,बेचैनी
लिखने वाले मन की
इन्हें सुर्ख होना चाहिए था
ताजे खून के जैसा
सुकून न सही
घिन तो आ जाती
सदियों से
कितने भी लिखे जाएँ
नही कम होती
खीझ,गुस्सा,बेचैनी
लिखने वाले मन की
इन्हें सुर्ख होना चाहिए था
ताजे खून के जैसा
सुकून न सही
घिन तो आ जाती
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