१...
लैपटॉप के एंटीवायरस से लेकर
अधूरी पड़ी स्क्रिप्ट तक
अधपके चावलों से लेकर
रूठी हुई सहेली तक
सुबह से शाम तक
शाम से सुबह तक
हर बार कहीं और हूँ मैं
कोई और हूँ मैं ।
२...
बार बार बजती घंटियों से उकताकर
एक ही बार में
एक ही वार में
राख में बदल दिया जाता है
वो परिन्दा
पर वो अमरपक्षी नहीं छोड़ता
अपने जीने की जिद
इस बार
वो मुझसे जिंदगी उधार ले गया ।
३...
दिन अच्छा है आज का
वजह है मेरे पास
तमाम किस्सों के साथ
मैं बेझिझक याद कर सकती हूँ ....तुम्हें आज
लैपटॉप के एंटीवायरस से लेकर
अधूरी पड़ी स्क्रिप्ट तक
अधपके चावलों से लेकर
रूठी हुई सहेली तक
सुबह से शाम तक
शाम से सुबह तक
हर बार कहीं और हूँ मैं
कोई और हूँ मैं ।
२...
बार बार बजती घंटियों से उकताकर
एक ही बार में
एक ही वार में
राख में बदल दिया जाता है
वो परिन्दा
पर वो अमरपक्षी नहीं छोड़ता
अपने जीने की जिद
इस बार
वो मुझसे जिंदगी उधार ले गया ।
३...
दिन अच्छा है आज का
वजह है मेरे पास
तमाम किस्सों के साथ
मैं बेझिझक याद कर सकती हूँ ....तुम्हें आज
No comments:
Post a Comment