बार बार चिल्लाने से कुछ नहीं होगा...
अब उखाड़कर बहा दी जानी चाहिए कोखें...
और रोक दी जानी चाहिए वंशों की नदियाँ...
सपाट जमीन में बदल दो औरतों को....
.....फिर नवरातों में मिट्टी लीपकर उगा लिया करना जवारे....
आखिर पूजना तो नहीं छोड़ोगे न तुम..?
.......नस्लों को जहर बुझे प्रति संवेदना के टीके लगवा दो.....
.......और हर पिता को शैतान करार दे दो...
क्यों कि मादा देह की उत्पत्ति में सहभागी था वो....
सजा के तौर पर बना दो उसे कोठे का तबलची
....हाय मैं इतना बोलती क्यों हूँ
.......क्यों न मुझे एक प्याला H2SO4 पिला दो!
अब उखाड़कर बहा दी जानी चाहिए कोखें...
और रोक दी जानी चाहिए वंशों की नदियाँ...
सपाट जमीन में बदल दो औरतों को....
.....फिर नवरातों में मिट्टी लीपकर उगा लिया करना जवारे....
आखिर पूजना तो नहीं छोड़ोगे न तुम..?
.......नस्लों को जहर बुझे प्रति संवेदना के टीके लगवा दो.....
.......और हर पिता को शैतान करार दे दो...
क्यों कि मादा देह की उत्पत्ति में सहभागी था वो....
सजा के तौर पर बना दो उसे कोठे का तबलची
....हाय मैं इतना बोलती क्यों हूँ
.......क्यों न मुझे एक प्याला H2SO4 पिला दो!
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